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"सुनीता विलियम" Sunita Williams

"सुनीता विलियम" Sunita Williams


पूरा नाम     –  सुनीता माइकल जे. विलियम( विवाहपूर्व – सुनीता दीपक पांड्या)
जन्म          –  19 सितम्बर 1965
जन्मस्थान –  युक्लिड, ओहियो राज्य
पिता          –  डॉ. दीपक एन. पांड्या
माता          –  बानी जालोकर पांड्या
विवाह        –  माइकल जे. विलियम ( Sunita Williams Husband )


सुनीता विलियम अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के माध्यम से अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला है। अंतरिक्ष में 7 बार जाने वाली (50 घंटे 40 मिनट स्पेसवॉक) वह पहली महिला है। वह अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन अभियान दल 14 और 15 की सदस्य भी रह चुकी है। 2012 में, उन्होंने अभियान दल 32 में फ्लाइट इंजिनियर बनकर और अभियान दल 33 में कमांडर बनकर सेवा की थी।

सुनीता लिन पांड्या विलियम का जन्म अमेरिका के ओहियो राज्य में युक्लिड (स्थित क्लीवलैंड) नगर में हुआ था। मैसाचुसेट्स से हाई स्कूल पास करने के बाद उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की नौसेना अकादमी से फिजिकल साइंस में बीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। बाद में उन्होंने फ्लोरिडा इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में एम्एस की उपाधि हासिल की।

उनके पिता डॉ. दीपक एन. पांड्या एक जाने माने तंत्रिका विज्ञानी (एमडी) है, जिनका संबंध भारत के गुजरात राज्य से है। उनकी माँ बानी जालोकर पांड्या स्लिवेनिया की है। उनका एक बड़ा भाई जय थॉमस पांड्या और एक बड़ी बहन डायना एन पांड्या है। जब सुनीता की आयु एक वर्ष से भी कम की थी तब उनके पिता अहमदाबाद से अमेरिका के बोस्टन आकर बस गये।

हालाँकि बच्चे अपने दादा-दादी, ढेर सारे चाचा-चाची और चचेरे भाई-बहनों को छोड़कर ज्यादा खुश नही थे, लेकिन उन्हें फिर भी जाना पड़ा। अगस्त 1988 में उनका अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा में चयन हुआ और जॉनसन स्पेस सेंटर में प्रशिक्षण शुरू हुआ।

सूनिता ने ये घोषित किया की वे हिन्दू भगवान् गणेश को बहोत मानती है और जब वे अंतरिक्ष गयी थी तो वे अपने साथ हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ भगवद गीता भी ले गयी थी। इसके साथ ही सुनीता सोसाइटी ऑफ़ एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट की सदस्य भी है।

उनका विवाह माइकल जे. विलियम से हुआ, वे नौसेना पोत चालक, हेलीकाप्टर पायलट, परिक्षण पायलट, पेशेवर नौसैनिक और गोताखोर भी है।

सितम्बर 2007 में विलियम भारत आयी थी। भारत में वह साबरमती आश्रम भी गयी और अपने गाव झुलसान (गुजरात) भी गयी। वहा गुजरात सोसाइटी ने उन्हें सरदार वल्लभभाई पटेल विश्व प्रतिभा अवार्ड से सम्मानित किया। और वह पहली ऐसी महिला बनी जिन्होंने विदेश में रहते हुए एक पुरस्कार को हासिल किया।

4 अक्टूबर 2007 को विलियम ने अमेरिकी एम्बेसी स्कूल में भाषण दिया और वही उनकी मुलाकात भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से हुई।

 


सुनीता विलियम के सम्मान और पुरस्कार


1) नेवी एंड मैरिन क्रॉप अचीवमेंट मैडल।
2) ह्युमनीटेरियन सर्विस मैडल।
3) नेशनल डिफेन्स सर्विस मैडल।
4) नासा स्पेसफ्लाइट मैडल।
5) गवर्नमेंट ऑफ़ रशिया द्वारा 2011 में “स्पेस अभियान दल” में मेरिट आने के लिये मैडल।
6) भारत सरकार द्वारा 2008 में पद्म भूषण से नवाजा गया।
7) गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी द्वारा 201३ में डॉक्टरेट की उपाधि दी गयी।
8) स्लोवेनिया सरकार द्वारा सन 2013 में गोल्डन आर्डर फॉर मेरिट्स का सम्मान।

सुनीता विलियम “महिला एक व्यक्तित्व अनेक” की एक सच्ची कहानी है।
भारतीय मूल की अंतरिक्ष वैज्ञानिक सुनीता विलियम्स का नाम आज कौन नहीं जानता। यह नाम है एक ऐसा असाधारण महिला का, जिसके नाम अनेक रिकार्ड दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने अंतरिक्ष में 194 दिन, 18 घंटे रहकर विश्व रिकार्ड बनाया।

यह लेख उसी अप्रतिम महिला की असाधारण इच्छाशक्ति, दृढ़ता, उत्साह तथा आत्मविश्वास की कहानी है।उनके इन गुणों ने उन्हें एक पशु चिकित्सक बनने की महत्वाकांक्षा रखने वीली छोटी-सी बालिका के एक अंतरिक्ष-विज्ञानी, एक आदर्श प्रतिमान बना दिया। अंतरिक्ष में अपने छह माह के प्रवास के दौरान वे दुनियाभर के लाखों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।

सुनीता समुद्रों में तैराकी कर चुकी हैं महासागरों में गोताखोरी कर चुकी हैं, युद्ध और मानव-कल्याण के कार्य के लिए उड़ानें भर चुकी हैं, अंतरिक्ष तक पहुँच चुकी हैं और अंतरिक्ष से अब वापस धरती पर आ चुकी हैं और एक जीवन्त प्रेरणा का उदाहरण बन गई हैं।




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